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विद्रोही स्व-स्वर में “गांधी जी को महात ्मा बनाने वाले ग्रह -नक्षत्र” —विजय राजबली मा थुर

बलिदान दिवस पर विशेष:

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यद्यपि महात्मा गांधी ने सरकार में कोई पद ग्रहण नहीं किया;परन्तु उन्हें राष्ट्रपिता की मानद उपाधि से विभूषित किया गया है। गांधी जी क़े जन्मांग में लग्न में बुध बैठा है और सप्तम भाव में बैठ कर गुरु पूर्ण १८० अंश से उसे देख रहा है जिस कारण रूद्र योग घटित हुआ। रूद्र योग एक राजयोग है और उसी ने उन्हें राष्ट्रपिता का खिताब दिलवाया है। गांधी जी का जन्म तुला लग्न में हुआ था जिस कारण उनके भीतर न्याय ,दया,क्षमा,शांति एवं अनुशासन क़े गुणों का विकास हुआ। पराक्रम भाव में धनु राशि ने उन्हें वीर व साहसी बनाया जिस कारण वह ब्रिटिश सरकार से अहिंसा क़े बल पर टक्कर ले सके।

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गांधी जी क़े सुख भाव में उपस्थित होकर केतु ने उन्हें आश्चर्यजनक ख्याति दिलाई परन्तु इसी क़े कारण उनके जीवन क़े अंतिम वर्ष कष्टदायक व असफल रहे। (राजेन्द्र बाबू को भी ऐसे ही केतु क़े कारण अंतिम रूप से नेहरु जी से मतभेदों का सामना करना पड़ा था। )एक ओर तो गांधी जी देश का विभाजन न रुकवा सके और दूसरी ओर साम्प्रदायिक सौहार्द्र भी स्थापित न हो सका और अन्ततः उन्हें अंध -धर्मान्धता का शिकार होना पड़ा।

गांधी जी क़े विद्या भाव में कुम्भ राशि होने क़े कारण ही वह कष्ट सहने में माहिर बने ,दूसरों की भलाई और परोपकार क़े कार्यों में लगे रहे और उन्होंने कभी भी व्यर्थ असत्य भाषण नहीं किया। गांधी जी क़े अस्त्र सत्य और शस्त्र अहिंसा थे। गांधी जी क़े सप्तमस्थ गुरु ने ही उन्हें विद्वान व राजा क़े तुल्य राष्ट्रपिता की पदवी दिलाई।

गांधी जी क़े भाग्य भाव में मिथुन राशि है जिस कारण उनका स्वभाव सौम्य,सरस व सात्विक बना रहा.धार्मिक सहिष्णुता इसी कारण उनमें कूट -कूट कर भरी हुई थी। उन्होंने सड़ी -गली रूढ़ियों व पाखण्ड का विरोध किया अपने सदगुणों और उच्च विचारों क़े कारण अहिंसक क्रांति से देश को आज़ाद करने का लक्ष्य उन्हें इसी क़े कारण प्राप्त हो सका। गांधी जी क़े कर्म भाव में कर्क राशि की उपस्थिति ने ही उनकी आस्था श्रम,न्याय व धर्म में टिकाये रखी और इसी कारण राजनीति में रह कर भी वह पाप-कर्म से दूर रह कर गरीबों की सेवा क़े कार्य कर सके। गांधी जी का सर्वाधिक जोर दरिद्र -नारायण की सेवा पर रहता था और उसका कारण यही योग है। गांधी जी क़े एकादश भाव में सिंह राशि एवं चन्द्र ग्रह की स्थिति ने उन्हें हठवादी,सादगी पसन्द ,सूझ -बूझ व नेतृत्व की क्षमता सम्पन्न तथा विचारवान बनाया। इसी योग क़े कारण उनके विचार मौलिक एवं अछूते थे जो गांधीवाद क़े नाम से जाने जाते हैं। अस्तु गांधी जी को साधारण इन्सान से उठ कर महात्मा बनाने में उनके जन्म-कालीन ग्रह व नक्षत्रों का ही योग है।

 

विद्रोही स्व-स्वर में क्या ग्रहों की चा ल से इतना सब वाकई ज्ञात हो सकता है ?—विजय राजबल ी माथुर

Tuesday, April 24, 2012

ग्रहों की चाल ढालती है जिंदगी की चाल को -प्रेक्टिकल उदाहरण:

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मिसेज X (09 अक्तूबर 1954,प्रातः 04 बजे,आगरा)……मिसेज Y (07 सितंबर 1979,प्रातः

07-50,आगरा)


03 जून 2007 को हिंदुस्तान,आगरा के अंक मे प्रकाशित श्रीमती शबाना आज़मी और सुश्री रेखा की जन्मपत्रियों का विश्लेषण उन्हीं को आधार मान कर किया गया था। लेकिन आज यहाँ प्रस्तुत दोनों कुंडलियाँ मेरे द्वारा ही बनाई गई हैं और ये परस्पर माता-पुत्री की हैं। माता के लिए -मिसेज X और पुत्री के लिए मिसेज Y का प्रयोग किया जा रहा है। इस पूरे परिवार से एक ही कालोनी मे रहने के कारण जान-पहचान थी। ग्रहों की चाल को प्रेक्टिल रूप से स्पष्ट करने हेतु इन कुंडलियों का सहारा लिया जा रहा है । मिसेज X का जन्म आगरा मे,मद्रास मे जन्मी फिल्म अभिनेत्री ‘रेखा’ से लगभग 31 घंटे पूर्व हुआ है। रेखा और मिसेज X की राशियाँ एक ही ‘कुम्भ’ हैं किन्तु लग्न अलग-अलग हैं। मिसेज X की जन्मपत्री का चयन इसी वजह से किया है कि,’रेखा’ की जन्मपत्री का जो विवेचन दिया जा चुका है वह इस विश्लेषण की सहायता से आसानी से समझा जा सकता है।
मिसेज X : आगरा मे 09 अक्तूबर 1954 की प्रातः 04 बजे X का जन्म हुआ है उस आधार पर जन्म कुंडली बनी है। जन्म लग्न सिंह है,राशि कुम्भ है जो सुश्री रेखा की भी है। समस्त ग्रह रेखा और X की कुंडलियों मे एक ही राशियों मे हैं। जन्म समय मे अंतर होने के कारण सिर्फ लग्न अलग-अलग हैं। अतः ग्रह जिन भावों मे रेखा के हैं उससे भिन्न भावों मे X के हैं। X की जन्मपत्री के जिस भाव मे जिस राशि मे ग्रह हैं उनके अनुसार फल लिखा है और प्रेक्टिकल (वास्तविक ) जीवन मे वैसा ही चरितार्थ होता दिखा है अतएव ‘रेखा’की कुंडली मे उन्हीं ग्रहों के उन्हीं राशियों मे दूसरे भावों मे होने के कारण जो फल लिखा है वह भी प्रेक्टिकल (वास्तविक )जीवन मे वैसा ही चरितार्थ होना चाहिए । यही वजह X की जन्म कुंडली उदाहरणार्थ लेने का कारण बनी हैं।
X ने अपनी जन्मपत्री बनवाने को जब कहा तो विशिष्ट रूप से यह भी निवेदन किया कि,लिखित मे जो दें उससे अलग हट कर उन्हें ,उनके निगेटिव प्वाईंट्स व्यक्तिगत रूप से ज़रूर बता दें। अमूमन तमाम बातें ऐसी रहती हैं कि नजदीकी से नजदीकी व्यक्ति भी निगेटिव प्वाईंट्स नहीं जान पाता है परंतु ग्रहों का ज्योतिषीय विश्लेषण उन तथ्यों को उजागर कर सकता है। चूंकि X की पुत्री Y को न्यूम्रोलाजी का कुछ ज्ञान था अतः उसने अपनी माँ को उनके अपने निगेटिव प्वाईंट्स बताये थे और उन्हीं का वेरीफिकेशन वह मुझ से कराना चाहती थीं,कि क्या ग्रहों की चाल से इतना सब वाकई ज्ञात हो सकता है ?शायद अपनी पुत्री के ज्योतिषीय ज्ञान पर उन्हें भरोसा न रहा हो किन्तु उन्होने मुझे बताया कुछ नहीं सिर्फ मुझ से बताने को कहा था और बाद मे आत्म-स्वीकृति द्वारा मेरे कथन की परिपुष्टि की थी।

X के शिक्षक पति बेहद सौम्य व्यवहार वाले थे। किन्तु उनकी(X) कुंडली मे स्थित राशि बता रही थी कि वह काफी उग्र स्वभाव के और आक्रामक होंगे। अतः विश्लेषण लिखना शुरू करने से पूर्व X से साफ-साफ पूछा कि क्या मास्टर साहब जैसे दिखाई देते हैं उसके उलट स्वभाव उनका है ,क्या वह वास्तव मे दबंग हैं? X का जवाब प्रश्नवाचक था कि क्या उनकी कुंडली से उनके पति का यह स्वरूप सामने आया है। हाँ कहने पर उन्होने कुबूल किया कि शहर मे तो वह नम्र रहते हैं गाँव मे दबंगी दिखाते हैं कभी वांछित व्यक्ति न मिलने पर उसके घर से भैंस खोल कर अपने घर ले आए थे। समस्त बातें रफ पेपर से पढ़ कर उन्हें सुना दी जिन्हें उन्होने स्वीकार कर लिया परंतु लिखित मे वही दिया जो पॉज़िटिव था। बाद मे X ने अपने हाथ मे भी निगेटिव बातों का ज्ञान होने की बात पूछी थी उन्हें बता दिया था कि जन्मपत्री को गणना मे गलती के आधार पर आप नकार भी दें लेकिन अपनी लकीरों को छिपा या बदल नहीं सकती हैं।

X के पति भाव मे बैठा ‘चंद्र’ उनके पति को ऊपर से सौम्य बनाए हुये था और लग्न पर पूर्ण सप्तम दृष्टि के कारण खुद X के चेहरे को लावण्य मय रूप प्रदान कर रखा था ,लग्न ने कमर तक उनके शरीर को आकर्षकत्व प्रदान किया था। उनकी कुंडली मे पति का कारक ग्रह ब्रहस्पति द्वादश भाव मे उच्च का है और नवम दृष्टि से आयु के 20 वे भाव को देख रहा है जहां ‘मीन’ राशि स्थित है जो खुद ब्रहस्पति की ही राशि है । अतः जीवन के 20वे वर्ष मे उनका विवाह तय हो गया और 08 दिसंबर 1974 को विवाह बंधन मे बंध गईं।उस समय वह ब्रहस्पति की महादशा के अंतर्गत ‘चंद्र’ की अंतर्दशा मे थीं जिसका प्रभाव बाधापूर्ण होता है। तृतीय भाव मे उच्च का शनि है जिसने उनके बाद भाई नहीं उत्पन्न होने दिये। उनके बाद दो बहने और हुई तब ही भाई हुये। शनि की स्थिति उन्हें निम्न -स्तर के कार्यों हेतु प्रेरित करने वाली है। सुख भाव मे मंगल की वृश्चिक राशि मे शुक्र स्थित है जो यह दर्शाता है कि विपरीत योनि के लोग उनमे आकर्षण रखते होंगे और वह उनमे ,उनके जीवन मे उनके प्रेमियों का भी हस्तक्षेप होगा। हाथ की लकीरों से रिश्ता भी स्पष्ट था और उन्हें बता दिया कि छोटे देवर व छोटे बहनोई से उनका शारीरिक संबंध होना चाहिए जिसे यह कह कर उन्होने कुबूल किया कि इन सब बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता है। पंचम संतान भाव मे ‘मंगल’ व ‘राहू’ की स्थिति से उन्होने बचपन मे अपनी पुत्री Y के अनुत्तीर्ण होने की ही बात नहीं स्वीकारी बल्कि हँसते हुये यह भी स्वीकार किया कि ‘एबार्शन’ तो जान-बूझ कर करवाए -कितने बच्चे पैदा करते? उन्होने यह भी स्वीकार किया कि पैदा करने पर पहचान का भी भय था।उनकी प्रथम संतान पुत्र है जो ग्रह योगों के अनुरूप ही पूर्ण आज्ञाकारी है। मिसेज Y उनकी दूसरी संतान है और उससे एक वर्ष छोटी दूसरी पुत्री है। उच्च के ब्रहस्पति ने धन-दौलत,मान-सम्मान,उच्च वाहन सुख सभी प्रदान किए हैं।
मिसेज Y :
Y की राशि भी अपनी माँ वाली ‘कुम्भ’ही है परंतु लग्न-‘कन्या’ है जो ‘प्रेम’ मे असफलता प्रदान करती है। और इस कुंडली मे लग्नेश,पंचमेश व सप्तमेश सभी ‘द्वादश’भाव मे बैठे है जो ‘व्यय भाव’ होता है। अतः Y को प्रेम के मामले मे सावधानी की आवश्यकता थी जो बात उसने अपनी माँ के माध्यम से पुछवाई थी। X को स्पष्ट रूप से बता दिया गया था कि यदि विवाह करना हो तो ‘एरेंज्ड मेरेज’ के जरिये ही हो वरना ‘प्रेम-विवाह’ सफल नहीं हो सकता। यह बात Y के 2003 मे जाब पर बेंगलोर जाते समय X ने पूछी थी और 2008 मे जब Y ने अंतरजातीय प्रेम विवाह की बात उठाई तो मास्टर साहब ने बेटी और उसके प्रेमी को गोली से उड़ा देने की धमकी दी। X ने पूर्व जानकारी के आधार पर कोई नाटक खेला जिसमे उनका बी पी भी काफी लो हो गया और मास्टर साहब की पूर्व शिष्या लेडी डॉ के मुताबिक दिमाग पर भी झटके का असर था। लिहाजा अपनी शिष्या रही डॉ की सलाह पर मास्टर साहब ‘एरेंज्ड मेरेज’ करने को राजी हो गए। 15 दिन की तड़ापड़ी मे तैयारी करके 29 जनवरी 2008 को Y का विवाह किया गया।

X और Y की जब तुलना की जाये तो ग्रहों की चाल का असर साफ-साफ समझ आ जाएगा। इंटर पास X को सफलता और क्वालिफ़ाईड इंजीनियर Y को असफलता अपने-अपने ग्रहों के अनुरूप ही मिल रही थी। यदि पूर्व मे ज्योतिषीय ज्ञान से खतरे का आंकलन न होता तो निश्चय ही Y को अपने प्रेमी सहित मौत का सामना करना पड़ता क्योंकि कुंडली मे चंद्रमा षष्ट भाव मे राहू के साथ ‘ग्रहण योग’ बना रहा है। X की कुंडली मे लग्नेश सूर्य बुध की राशि मे है और बुध शुक्र की राशि मे शनि के साथ जो कि सप्तमेश है ,पंचम ‘प्रेम’ भाव मे शनि सरीखा राहू तो है ही पंचमेश ब्रहस्पति ‘चंद्र’ की राशि मे है और ‘चंद्र’ सप्तम भाव मे शनि की राशि मे। इस प्रकार लग्नेश,पंचमेश और सप्तमेश मे अच्छा तालमेल होने के कारण X विवाहोपरांत भी प्रेमियों से सफल संपर्क कायम रख सकीं जबकि Y को फजीहत और झगड़े के बाद ही X की तिकड़म और हस्तक्षेप से मन की मुराद पूरी करानी पड़ी। X के हाथ मे विवाह रेखा के समानान्तर दो और सफल रेखाएँ स्पष्ट रूप से स्थित हैं जबकि Y के हाथ मे एक ही रेखा भी जटिल संकेत देती है।

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नोट :—
‘रेखा’,X और Y के विश्लेषणों द्वारा माता-पिता और संतान के अंतर सम्बन्धों का भी परिचय स्पष्ट मिलता है।

 

विद्रोही स्व-स्वर में भद्र-योग क़े कारण ही शास्त्री जी -प्रधान मंत्री पद जितना ऊंचा उ ठ सके —विजय राजबली माथुर

लाल बहादुर शास्त्री जी

पुण्य तिथि (११ जनवरी) पर स्मरण:

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एक उच्च कोटि क़े विद्वान् का कथन है कि,मनुष्य और पशु क़े बीच विभाजन रेखा उसका विवेक है। जहाँ यह विवेक छूता है ,वहां मनुष्य और पशु में कोई भेद नहीं रह जाता है। १९६५ क़े भारत-पाक संघर्ष क़े दौरान जब लिंडन जॉन्सन ने शास्त्री जी को पाकिस्तानी क्षेत्र में न बढ़ने की चेतावनी दी तो शास्त्री जी ने अमेरिकी पी.एल.४८० को ठुकरा दिया था और जनता से सप्ताह में एक दिन सोमवार को सायंकाल क़े समय उपवास रखने का आह्वान किया था ;जनता ने सहर्ष शास्त्री जी की बात को शिरोधार्य कर क़े उस पर अमल किया था। यह दृष्टांत शास्त्री जी की लोकप्रियता को ही दर्शाता है और यह शास्त्री जी क़े स्वाभिमान का भी प्रतीक है।
सब की सुनने वाले -शास्त्री जी जितने दबंग थे और गलत बात को कभी भी किसी भी हालत में स्वीकार नहीं करते थे ,उतने ही विनम्र और सब की सुनने वाले भी थे.जब शास्त्री जी उ.प्र.क़े गृह मंत्री थे तो क्रिकेट मैच क़े दौरान पुलिस ने स्टेडियम में छात्रों पर लाठी चार्ज कर दिया था। उस समय पुलिस की टोपी लाल रंग की हुआ करती थी। लखनऊ विश्वविद्यालय क़े छात्र संघ क़े अध्यक्ष क़े नेतृत्व में छात्रों का एक प्रतिनिधिमंडल शास्त्री जी से मिला और पुलिस को हटाने क़े सम्बन्ध में आग्रह किया और कहा -मंत्री जी कल से लाल टोपी खेल क़े मैदान में नहीं दिखाई देनी चाहिए.शास्त्री जी ने नम्र भाव से उत्तर दिया ठीक है ऐसा ही होगा। शास्त्री जी ने लखनऊ क़े सारे दर्जियों को लगा कर रात भर में खाकी टोपियाँ सिलवा दीं और जब अगले दिन छात्र पुनः शिकवा लेकर शास्त्री जी से मिले तो शास्त्री जी ने सहज भाव से कहा -तुम लोगों ने लाल टोपी न दिखने की बात कही थी,हमने उन्हें हटा कर खाकी टोपियाँ सिलवा दीं हैं।
नितांत गरीबी व अभावों में पल-बढ़ कर शास्त्री जी इतने बुलंद कैसे हुए और ऊपर कैसे उठते गये ,आईए जाने उनके ग्रह -नक्षत्रों से. शास्त्री जी की हथेली में मणिबंध से प्रारम्भ और शनि तथा बृहस्पति पर द्विविभाजित भाग्य रेखा ने लाल बहादुर शास्त्री जी को उच्च पद पर पहुँचाया और निर्भीक, साहसी,लोकप्रिय व देशभक्त बनाया,जिसकी पुष्टि उनके जन्मांग से स्पष्टतःहो जाती है।

कुंडली

 

विद्रोही स्व-स्वर में क्या ममता बनर्जी प्रधानमंत्री बन सकती हैं?—विजय राजबली माथुर

ममता जी ने अब जीवन के 60वें वर्ष में चार दिन पूर्व प्रवेश कर लिया है और यह वर्ष उनको अनेक उपलब्धियां दिलाने वाला साबित हो तो कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए। मूल रूप से यह विश्लेषण ‘क्रांतिस्वर’पर प्रकाशित हो चुका है:

Friday, October 19, 2012

ममता बनर्जी के प्रधानमंत्री बनने की संभावनाएं ?

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पुराने अखबारों का अवलोकन करते समय सुश्री ममता बनर्जी की यह जन्मपत्री दिखाई दे गई जिसमे सन 2002 तक का उनका भविष्य लेखक ने अपनी थ्यौरी से दिया था। उसके सही-गलत होने की विवेचना मैं नहीं कर रहा हूँ। मैंने विगत विधानसभा चुनावों से पूर्व अपने एक लेख द्वारा ममता जी की कटु राजनीतिक आलोचना भी की थी और पश्चिम बंगाल की जनता से आह्वान भी किया था कि वह ममता जी को सत्तारूढ़ न होने दे। परंतु ममता जी मुख्यमंत्री बनी और बड़ी शान से बनीं। इसलिए भी कौतूहल था उनका भविष्य जानने का और इसलिए भी कि दार्जिलिंग ज़िले के सिलीगुड़ी मे 8वी कक्षा से 10वी बोर्ड की परीक्षा पास करने तक रहने के कारण बंगाल की राजनीति मे दिलचस्पी सदा ही रही है। वहाँ से 10-15 किलोमीटर दूर ही है नक्सल बाड़ी जहां 1967 मे ‘नक्सल बाड़ी से नल बाड़ी तक’ आंदोलन हमारे रहते ही शुरू हुआ था। इस आंदोलन का सम्पूर्ण लाभ राजस्थान के मारवाड़ियों को हुआ था जिनको इंश्योरेंस क्लेम नुकसान से कहीं बहुत ज़्यादा मिला था। अपनी राजनीतिक विचारधारा के आधार पर आज भी मैं ममता जी का समर्थक नहीं हूँ,परंतु उनके ग्रह-नक्षत्र जो बोल रहे हैं उनको झुठलाया भी तो नहीं जा सकता। misuse of knowledge भी मैं नहीं कर सकता। अतः ममता जी की कुंडली का वैज्ञानिक निष्पक्ष विश्लेषण प्रस्तुत करने मे कोई पूर्वाग्रह(IBN7 के प्रतिनिधि ब्लागर एवं उनकी सहयोगी पूना प्रवासी ब्लागर की भांति जो ज्योतिष को मीठा जहर कहते हैं ) भी नहीं है।

ममता जी की प्रस्तुत जन्मपत्री के अनुसार उनका जन्म लग्न-मकर है और—

द्वितीय भाव मे कुम्भ का ‘मंगल’

पंचम भाव मे वृष का ‘चंद्रमा’

षष्ठम भाव मे मिथुन का ‘केतू’

सप्तम भाव मे कर्क का ‘ब्रहस्पति’

दशम भाव मे तुला का ‘शनि’

एकादश भाव मे वृश्चिक का ‘शुक्र’

द्वादश भाव मे धनु के ‘सूर्य’,’बुध’ और ‘राहू’

अखबारी विश्लेषण से अलग मेरा विश्लेषण यह है कि जन्म के बाद ममता जी की ‘चंद्र महादशा’ 07 वर्ष 08 आठ माह एवं 07 दिन शेष बची थी। इसके अनुसार 03 जूलाई 2010 से वह ‘शनि’महादशांतर्गत ‘शुक्र’ की अंतर्दशा मे 03 सितंबर 2013 तक चलेंगी। यह उनका श्रेष्ठत्तम समय है। इसी मे वह मुख्य मंत्री बनी हैं। 34 वर्ष के मजबूत बामपंथी शासन को उखाड़ने मे वह सफल रही हैं तो यह उनके अपने ग्रह-नक्षत्रों का ही स्पष्ट प्रभाव है।

इसके बाद पुनः ‘सूर्य’ की शनि मे अंतर्दशा 15 अगस्त 2014 तक उनके लिए अनुकूल रहने वाली है और लोकसभा के चुनाव इसी अवधि के मध्य होंगे। केंद्र (दशम भाव मे )’शनि’ उनको ‘शश योग’ प्रदान कर रहा है
जो ‘राज योग’ है।

*ममता जी को समयानुकूल सही बात कहने व उठाने का विलक्षण लाभ भी उनके ग्रह प्रदान कर रहे हैं और इसी लिए FDI को मुद्दा बना कर उन्होने ‘संप्रग-2’ से अलगाव कर लिया है।
*उससे पूर्व राष्ट्रपति चुनावों के दौरान प्रकट मे मुखर्जी साहब का विरोध करके उनको बामपंथियों के एक गुट -CPM का समर्थन दिला दिया फिर खुद भी उनका समर्थन कर दिया। मुखर्जी साहब ने मुलायम सिंह जी व ममता जी को वेंकट रमन साहब सरीखा आश्वासन दे रखा है जिसके अनुसार कांग्रेस का स्पष्ट बहुमत न आने पर वह ‘तीसरे मोर्चे’ को अवसर देंगे।देखें—

(शनिवार, 28 जुलाई 2012

नए महामहिम —केंद्र मे गैर कांग्रेस/भाजपा सरकार का रास्ता साफ

महामहिम प्रणब मुखर्जी साहब की शपथ कुंडली का विश्लेषण भी। )

http://krantiswar.blogspot.in/2012/07/blog-post_28.html

ममता जी की कुंडली मे ‘बुध-आदित्य’योग भी है वह भी ‘राज योग’ है। षष्ठम भाव का ‘केतू’ उनके शत्रुओं का संहार करने मे सक्षम है। सप्तम मे उच्च के ‘ब्रहस्पति’ ने जहां उनको अविवाहित रखा वहीं वह उनकी लग्न को पूर्ण दृष्टि से देखने के कारण ‘बुद्धि चातुर्य’प्रदान करते हुये सफलता कारक है। जहां दशम मे उच्च का शनि उनको राजनीति मे सफलता प्रदान कर रहा है वहीं यही शनि पूर्ण दृष्टि से उनके सुख भाव को देखने के कारण सुख मे क्षीणता प्रदान कर रहा है। द्वितीय भाव मे शनि क्षेत्रीय ‘मंगल’ होने के कारण ही उनकी बात का प्रभाव उनके विरोधियों के लिए ‘आग’ का काम करता है जबकि यही जनता को उनके पक्ष मे खड़ा कर देता है।

ममता जी की जन्म कुंडली के मुताबिक उनको निम्न-लिखित पदार्थों का ‘दान भूल कर भी नहीं’ करना चाहिए। इंनका दान करने पर उनको हानि व पीड़ा ही मिलेगी —

1- चांदी,मोती,चावल,दही,दूध,घी,शंख,मिश्री,चीनी,कपूर,बांस की बनी चीजें जैसे टोकरी-टोकरा,सफ़ेद स्फटिक,सफ़ेद चन्दन,सफ़ेद वस्त्र,सफ़ेद फूल,मछली आदि।
2-सोना,पुखराज,शहद,चीनी,घी,हल्दी,चने की दाल,धार्मिक पुस्तकें,केसर,नमक,पीला चावल,पीतल और इससे बने बर्तन,पीले वस्त्र,पीले फूल,मोहर-पीतल की,भूमि,छाता आदि। कूवारी कन्याओं को भोजन न कराएं और वृद्ध-जन की सेवा न करें (जिनसे कोई रक्त संबंध न हो उनकी )।किसी भी मंदिर मे और मंदिर के पुजारी को दान नहीं देना चाहिए।

3-सोना,नीलम,उड़द,तिल,सभी प्रकार के तेल विशेष रूप से सरसों का तेल,भैंस,लोहा और स्टील तथा इनसे बने पदार्थ,चमड़ा और इनसे बने पदार्थ जैसे पर्स,चप्पल-जूते,बेल्ट,काली गाय,कुलथी, कंबल,अंडा,मांस,शराब आदि।

अगले माह ममता जी यू पी मे अपनी रैली करने जा रही हैं और संभावना है कि वह इंदिराजी जैसा आक्रामक रुख अख़्तियार करके जनता को (खास कर जो पहले कांग्रेस समर्थक रही है) अपने पक्ष मे मोड ले जाएंगी इसका भी लाभ तीसरे मोर्चे को ही मिलेगा क्योंकि मंहगाई से त्रस्त जो जनता कांग्रेस छोड़ कर भाजपा की ओर मुड़ती उसे ममता जी अपने साथ कर लेंगी। चुनाव बाद तीसरे मोर्चे की सरकार बनने की दशा मे मुलायम सिंह जी व ममता जी मे जिनके ग्रह-नक्षत्र प्रबल होंगे वही अगले प्रधानमंत्री होंगे। फिलहाल ममता जी की कुंडली मे राज योग और उनके अनुकूल समय को देखते हुये उनके प्रधानमंत्री बनने की संभावना को नकारा नहीं जा सकता है। ज्योतिष को मीठा जहर बताने वाले IBN7 के कार्पोरेटी दलाल अवश्य ही ममता जी को पी एम बनने से रोकने की गंभीर साजिश करेंगे ,अब देखना है कि वे अपने मीठे जहर का प्रयोग कितना और कैसे करते हैं?

 

विद्रोही स्व-स्वर में उमरावजान का आधुन िक सुल्तान कौन?रेखा राजनीति में कैसे??—विजय र ाजबली माथुर

मिर्ज़ा हादी रुसवा द्वारा 1905 में लिखित उर्दू उपन्यास ‘उमरावजान अदा’पर आधारित -1981 में प्रदर्शित फिल्म ‘उमराव जान’ के माध्यम से मुजफ्फर अली साहब ने 1840 से 1857 तक के काल खंड में ब्रिटिश साम्राज्य के सहारे चल रही नवाबों/सुल्तानों की विलासिता और ईमानदारों को कर्तव्य पालन के कारण होने वाली दुश्वारीयों/हानियों तथा निर्दोषों के उत्पीड़न-शोषण की जानकारी उपलब्ध कराई थी। किन्तु शायद इस फिल्म को भी मनोरंजन के ही एक दृष्टिकोण से लिया गया प्रतीत होता है। तभी तो आज दिग्गज चिंतक-विचारक और बड़े कम्युनिस्ट नेता भी ‘आप’ और केजरीवाल के दीवाने बने घूम रहे हैं।
आज ‘आप’/केजरीवाल उसी भूमिका में हैं जिसमें उस वक्त के सुल्तान और नवाब थे। जनता के उत्पीड़न और शोषण से संग्रहीत धन को कारपोरेट घराने इन नए सुल्तानों पर लुटा रहे हैं और ये नए सुल्तान मनमोहनी अदाओं से आज की उमराव जान अर्थात बेगुनाह जनता को दिवा-स्वप्न या ख़्वामख़्वाह के झूठे सब्जबाग दिखा रहे हैं ,जैसे इस सुल्तान ने उमरावजान को दिखाये थे। :

एक दारोगा की कर्तव्यपालन में बरती ईमानदारी की सजा उसकी पुत्री को दर-दर भटकने और ठोकरें खाने के रूप में प्राप्त हुई थी। चाह कर भी वह एक बार फँसने के बाद दलदल से न निकल सकी थी। यहाँ तक कि 1857 की क्रांति की तैयारियों में संलिप्त एक योद्धा ने जब उस लड़की को बचा कर निकालने का प्रयास किया तो उसको ही अपनी जान से हाथ धोना पड़ गया। क्रांति की विभीषिका में जब लखनऊ छोड़ कर बनारस जाने के फैजाबाद पड़ाव में भाग कर जब वह लड़की उमरावजान छिप कर वहीं डेरा जमा लेती है तो उसका अपना छोटा भाई जो उसके अपहरण का चश्मदीद गवाह था उसको भगा देता है और उसकी माँ भी उसकी रक्षा नहीं कर पाती है।
बिलकुल उसी लड़की जैसी दशा इस समय देश की जनता की हो रही है। कांग्रेस/भाजपा के साम्राज्यवादी मंसूबों को पूरा करने में संभावित संदेह को देखते हुये आज के नए ‘सुल्तान’ के रूप में ‘आप’/केजरीवाल का अवतरण किया गया है। देश की राजधानी दिल्ली की जनता को ठगने में सफल हो जाने के बाद इस सुल्तान के हौसले बुलंद हैं। सारे देश की जनता उमरावजान की भांति ठगे जाने को आतुर प्रतीत हो रही है। दुखद स्थिति यह है कि साम्राज्यवाद के विरुद्ध गर्जन/तर्जन करने वाले वामपंथी और कम्युनिस्ट भी इस नए सुल्तान पर फिदा होकर जनता को ठगे जाने की प्रक्रिया में ही शामिल होते दीख रहे हैं। छिट-पुट संघर्ष करने वालों की आवाज़ को उसी तरह दबा दिया जाएगा जिस प्रकार तब गदर के एक नायक फैज अली को उमरावजान को बचाने के प्रयास में मौत के घाट उतार दिया गया था।

 

विद्रोही स्व-स्वर में कैसा बीता यह वर्ष ?—विजय राजबली माथुर

यों तो परंपरागत रूप से जिस नव-वर्ष के आधार पर देश के तीज-त्योहार आदि चलते हैं वह चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से आरंभ होता है और सरकारी वर्ष भी पहली अप्रैल से आरंभ होता है परंतु अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नव-वर्ष का प्रारम्भ पहली जनवरी से होता है। अतः जनवरी से दिसंबर तक ई. सन 2013 हमें कैसा लगा यही सार्वजनिक करना इस पोस्ट का उद्देश्य है।
02 जनवरी 2013 को गांधी प्रतिमा,हजरतगंज,लखनऊ पर एक प्रतिरोध धरने में जिसका आयोजन ‘राही मासूम रजा साहित्य एकेडमी’ ने किया था भाग लिया था। फेसबुक लेखन के आधार पर पुलिस द्वारा अवैध गिरफ्तारियों के विरोध में आयोजित इस धरने में नगर के साहित्यकारों,रंगकर्मियों और जागरूक राजनीतिज्ञों ने भाग लिया था। मुझे एकेडमी के महासचिव और फारवर्ड ब्लाक,उत्तर प्रदेश के तत्कालीन प्रदेशाध्यक्ष कामरेड राम किशोर जी ने शामिल होने को कहा था,वह हमारी पार्टी के प्रदेश कार्यालय पर अक्सर आते रहते थे और उनका सम्मान हमारी पार्टी के वरिष्ठ नेता गण भी करते थे अतः उनके कहने पर इस पुनीत कार्य में मैं भी शामिल हुआ था।
इसके बाद उनकी एकेडमी द्वारा आयोजित कई साहित्यिक गोष्ठियों में उनके साथ भाग लिया जिनमें हमारी पार्टी से संबन्धित कई रंग कर्मी भी शामिल होते रहे थे। 07 अप्रैल को सम्पन्न एक गोष्ठी में उनके साथ भाग लेने जाते वक्त उन्होने मुझसे कहा कि कहाँ सी पी आई में पड़े हो हमारे साथ आ जाओ। वस्तुतः वह अपनी पार्टी छोड़ कर एक अलग पार्टी बनाने जा रहे थे और उसी में मुझको शामिल करना चाहते थे। लिहाजा उस दिन के बाद से मैंने उनकी साहित्यिक गोष्ठियों में भाग लेना बंद कर दिया। किन्तु वह मेरे पुत्र से अपनी पार्टी और एकेडमी के समाचार/विज्ञप्तियाँ आदि हेतु सहयोग लेने घर तब तक आते रहे थे जब तक कि उनको घर आने से मना नहीं कर दिया था।
23 मई 2013 से अपनी पार्टी के प्रदेश सचिव कामरेड डॉ गिरीश जी के निर्देश पर ‘पार्टी जीवन’ के कार्यकारी संपादक को सहयोग देने पार्टी कार्यालय जाने लगा। का सं महोदय काम की बात कम फिजूल की बातें ज़्यादा करते थे जैसे कि उनके पिताजी ने अपने बचपन में एक सहपाठी को कमीज़ से पकड़ कर उठा कर फेंक दिया। उन्होने खुद ने अपनी स्टूडेंट लाईफ में अपने एक सहपाठी को सीतापुर में भीड़ भरे चौराहे पर पीट दिया। पार्टी कार्यालय में AIYF के एक वरिष्ठ नेता को उन्होने झन्नाटेदार झांपड़ रसीद किया आदि-आदि। उन्होने मुझे पार्टी ब्लाग पर एडमिन राईट्स देकर लिखने को कहा जबकि पिछले छह वर्षों से पार्टी के प्रदेश सचिव तक को उन्होने एडमिन नहीं बनाया था। मुझे इसमें उनकी गहरी चाल नज़र आई और मैंने पार्टी के प्रदेश सचिव डॉ गिरीश जी व प्रदेश सह-सचिव डॉ अरविंद राज जी को उनकी अनुमति लेकर एडमिन बना दिया। इस पर का सं महोदय मुझसे ज़बरदस्त खार खा गए। उन्होने अपने समक्ष मुझे ब्लाग पोस्ट करने को कहा जिससे कि वह मेरा ID पासवर्ड जान कर अपने अज़ीज़ ब्लागर्स से संबन्धित मेरे पोस्ट्स डिलीट कर सकें। मैं उतना तो मूर्ख नहीं हूँ जितना लोग मुझे समझते हैं। पार्टी कार्यालय छोड़ते ही मैंने पुत्र को फोन करके अपना पासवर्ड बदलने को कहा जिसे पहले ही अपने ब्लाग्स में एडमिन बनाया हुआ था अन्यथा मेरे साईकिल से घर पहुँचते-पहुँचते वह साहब अपने घर स्कूटर से पहुँच कर मेरा पासवर्ड स्तेमाल करके अपना गुल खिला चुकते। प्रदेश सचिव व सह-सचिव को इस कृत्य की मौखिक सूचना दे दी थी। फिर भी उनके निर्देश पर जाता रहा तब का सं महोदय ने चाय में कुछ टोटके बाज़ी करके पिला दिया था जिससे लौटते में मार्ग में मुझे काफी दिक्कत हुई।अतः मैंने पार्टी कार्यालय में चाय पीना ही बंद कर दिया , इससे पूर्व भी मार्ग में कार व स्कूटर द्वारा एक्सीडेंट कराने का जो प्रयास हुआ उसमें उनका ही हाथ नज़र आया था और इसका उल्लेख इसी ब्लाग में तभी किया भी था।
12 जूलाई 2013 को प्रदेश सचिव और प्रदेश सह-सचिव के जीप द्वारा बांदा जाते हुये विंड मिरर में विस्फोट हुआ और वे सौभाग्य से ड्राईवर समेत सुरक्षित बचे। इस घटना का ज़िक्र खुद डॉ गिरीश जी ने पार्टी के राष्ट्रीय सचिव कामरेड अतुल अनजान साहब एवं खुद का सं महोदय की उपस्थिती में 13 जूलाई 2013 को किया था। उस रोज ज़िला काउंसिल की बैठक के बाद यह अनौपचारिक वार्ता थी। उस दिन की मीटिंग के दौरान ही का सं महोदय ने मिनिट्स लिखने के दौरान पहले मेरी कुर्सी फिर मेरे पैरों पर अपने पैरों से ठोकर मारी फिर मेरे पेट में उंगली भोंक कर अनावश्यक निर्देश देने शुरू किए। उस दिन के बाद से मैंने पार्टी जीवन के कार्य हेतु उनको सहयोग करना बंद कर दिया किन्तु ब्लाग में लिखता रहा था जिसके लिए मैंने नई ID व पास वर्ड बना लिए थे। 09 सितंबर को का सं महोदय ने राष्ट्रीय सचिव कामरेड अनजान साहब से संबन्धित मेरी एक पोस्ट भी ब्लाग से डिलीट कर दी और मुझे एडमिन व आथरशिप से हटा दिया।
अगले ही दिन 10 सितंबर 2013 को मैंने ‘साम्यवाद (COMMUNISM)’ नामक एक अलग ब्लाग बना कर उसमें उस डिलीटेड पोस्ट को भी प्रकाशित कर दिया। तब से अब तक 112 दिन में 92 पोस्ट्स प्रकाशित हो चुकी हैं जिनको 5441 बार पढ़ा जा चुका है और 18 ब्लाग फालोर्स हो चुके हैं। जब 04 जून को पहली पोस्ट मैंने पार्टी ब्लाग में दी थी तब उसके फालोअर्स 50 थे और जब मुझे उससे प्रथक किया गया -09 सितंबर को उस ब्लाग के फालोअर्स बढ़ कर 65 हो चुके थे। 20 नवंबर 2013 से हमने एक नया फेसबुक ग्रुप ‘UNITED COMMUNIST FRONT’ भी प्रारम्भ कर दिया है और आज तक 216 कामरेड्स उसके सदस्य बन चुके हैं।
हालांकि इस ओर ध्यान देने से हमारे पहले से चल रहे ब्लाग्स -‘क्रांतिस्वर’, ‘विद्रोही स्व-स्वर में’ , ‘जनहित में’, ‘सर्वे भवन्तु….’, ‘कलम और कुदाल’ तथा श्रीमती जी का ब्लाग ‘पूनम वाणी’ पर लेखन प्रभावित हुआ है किन्तु उनको भी हम चला रहे हैं।
प्रश्न यह उठता है कि का सं महोदय ने ऐसा क्यों किया? उनको मुझसे क्या दुश्मनी थी? कामरेड राम किशोर जी इन महोदय के न केवल अभिन्न मित्र हैं बल्कि रिश्तेदार भी हैं उनके द्वारा मुझे पार्टी से बाहर कराने में विफल रहने पर उन्होने भीतर ही परेशान करके मुझे हटाने का षड्यंत्र रचा था जिसमें उनके एक जाति बंधु ने भी उनको सहयोग दिया है मुझे श्रद्धांजली देकर:
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इस फोटो से ज्ञात होता है कि अपने षडयंत्रों में विफल रहने पर ये लोग किस स्तर तक गिर सकते है कि ‘श्रद्धांजली’ तक दे डालते हैं। तुर्रा यह है कि ये सभी पार्टी के बड़े नेता हैं जबकि मैं एक मामूली सा कार्यकर्ता हूँ।
मात्र एक माह की जान-पहचान कितना बड़ा झूठ लिखा है ?इन पंडित जी ने । सितंबर में हमारे ‘साम्यवाद’ ब्लाग की कई पोस्ट्स यह शेयर करते रहे थे और फ्रेंड रिक्वेस्ट भी खुद भेजी थी जिसे स्वीकार करके शायद मैंने गलती कर दी थी। 20 नवंबर 2013 को तो मैं पार्टी कार्यालय में प्रदेश सचिव जी से मिलने गया था जहां यह पंडित जी भी मिले थे व्यक्तिगत रूप से और 30 सितंबर की रैली में मेरे द्वारा उनसे न मिलने पर उलाहना भी यह फेसबुक पर दे चुके थे। जो ‘झूठ’ को बड़ा हथियार मानते हों वे व्यावहारिक रूप से भले ही अच्छे माने जाएँ अपने दुष्कृत्यों में सफल होंगे यह सुनिश्चित नहीं है। का सं महोदय व उनके यह सहयोगी दोनों ही राष्ट्रीय सचिव कामरेड अनजान व पूर्व महासचिव कामरेड बर्द्धन के व्यक्तिगत विरोधी हैं जिसका खुलासा मैंने अपने ब्लाग के माध्यम से कर दिया जिस कारण ये मुझसे घनघोर शत्रुता करने लगे। हम उम्मीद करते हैं इन दुष्कृत्यों को ये लोग 2013 की समाप्ती के साथ-साथ छोड़ सकें और 2014 में एक साफ-सुथरा जीवन शुरू कर सकें।
सभी जनों को आने वाले वर्ष 2014 की अग्रिम शुभकामनायें।

 
 
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