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Monthly Archives: May 2014

विद्रोही स्व-स्वर में बाप-बेटे ने क्या बोया क्या उखाड़ा ……

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http://vranishrivastava1.blogspot.in/2014/05/blog-post_16.html

16 मई 2014 को संदर्भित ब्लाग में हमारे ऊपर यह व्यक्तिगत आक्षेप लगाने का कारण चुनाव पूर्व हमारे द्वारा चुनाव में भाग लेने हेतु फेसबुक और ब्लाग्स में किए गए अनुरोध थे। उपरोक्त ब्लाग लेखिका द्वारा हमारे अनुरोधों के विपरीत अपने फेसबुक व ब्लाग द्वारा चुनाव बहिष्कार की अपीलें की जा रही थीं। लेखिका के पति व पुत्र दोनों ही इंजीनियर हैं और संभवतः यह बनारसी बाबू भी उनका ही कोई रिश्तेदार होगा:

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11 मई को बनारस में EVM से यह कारगुजारी हो रही थी और 12 मई को वहाँ वोट पड़े थे। जिस प्रकार बनारस का परिणाम पूर्व प्रायोजित था उसी प्रकार लखनऊ का परिणाम भी पूर्व प्रायोजित रहा होगा जिसे श्रीवास्तव इंजीनियर लोग बखूबी जानते रहे होंगे तभी तो यह अहंकारी शब्द हमारे लिए प्रयोग किया गया था कि,"बाप-बेटे ने क्या बोया क्या उखाड़ा ……"
देश के एक नागरिक की हैसियत से देशवासियों से मतदान में भाग लेने और कर्तव्य -पालन करने की प्रेरणा देना कतई कोई गुनाह नहीं है। गुनाह तो है EVM से छेड़-छाड़ करके मतदान को प्रभावित करना या मतदान बहिष्कार की अपीलें करना।
पटना की मूल निवासी व पूना प्रवासी रश्मिप्रभा श्रीवास्तव की यह रिश्तेदार वस्तुतः मुझे व मेरे पुत्र को समूल नष्ट करने तथा हम लोगों की हत्या करवाने के षडयंत्रों शामिल प्रतीत होती है। 2012 में रश्मिप्रभा के एजेंट और IBN7 के पत्रकार महेंद्र श्रीवास्तव ने इस प्रकार की धमकियाँ भी दी थीं।क्योंकि रश्मिप्रभा ने चार-चार कुंडलियों का निशुल्क विश्लेषण करवा लेने के बाद मेरे ज्योतिषीय ज्ञान को ही गलत ठहराना शुरू किया था जिसमें महेंद्र श्रीवास्तव और मुकेश सिन्हा उनको सहयोग दे रहे थे तब मेरे पुत्र को फेसबुक मेसेज के जरिये यही विभा रानी श्रीवास्तव उन रश्मिप्रभा श्रीवास्तव के बारे में सूचनाएँ देती रहती थीं जैसे:

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    • Good Morning
  • Vibha Rani Shrivastava
    August 24
    Vibha Rani Shrivastava

    • kal raat me Satyam Shivam kaa msg :-
    • maine aapki poems padhi….laazwab hai…aap humari spl 10 poets ke book me shamil ho sakti hai…par aapko to pata hai ki bina aarthik sahyog ke kuch v sambhav nhi…aapko ek nischit sahyog rashi deni hogi….jiske badle aapko bahut kuch milega….royality mneeey,magzine ki aajeevan sadsyata aur v bahut kuch…aur ek bahut bade sanstha se judne ka mauka…aap bataye aap sahyog rashi de payengi….http://www.sahityapremisangh.com/

रश्मी प्रभा के 05-09-2012 की कविता पर विभा रानी-

Vibha Rani Shrivastava ने कहा… कई विषैलों को बेनकाब कर
बाहर कर दिया
और परिस्थितियों का क्षोभ ना हो
तो सीखना मुमकिन नहीं !
आप ,मेरी ~~~गुरु ~~~आदर्श ~~~ हैं
6 सितम्बर 2012 6:19 am और रश्मिप्रभा श्रीवास्तव ने हमारे विरुद्ध षड्यंत्र क्यों किए? वस्तुतः एक समय रश्मिप्रभा पूना में हमारी छोटी भांजी की पड़ौसन रही हैं और वहीं हमारी छोटी बहन व भांजी ने उनको हमारे विरुद्ध गुमराह किया व भड़काया है। क्योंकि शालिनी की मृत्यु के बाद 1994 में बहन मेरे पुत्र को मेरी माँ से मांग कर ले जाना चाह रही थीं जिसे हमारे छोटे भाई की पत्नी ने विफल करवा दिया था। हमें इन सब बातों का खुलासा काफी समय बाद हो सका है और हम धोखे में रहे। बहन-बहनोई नहीं चाहते थे कि पूनम जो पटना की श्रीवास्तव हैं से मेरा विवाह हो परंतु मैंने अपने पिताजी द्वारा पूनम के पिताजी से चलाये पत्र-व्यवहार का सम्मान करते हुये छोटे बहन-बहनोई की बात नहीं मानी थी इसीलिए पटना से लौटते ही उन लोगों ने नाटक खेलना शुरू कर दिया था। उनके खेल को गति दी दरियाबाद से संबन्धित और रांची प्रवासी वीणा श्रीवास्तव ने जिनहोने रश्मिप्रभा श्रीवास्तव के पटना से संबन्धित होने के कारण हमारी बहन-भांजी से इसलिए संपर्क करवाया कि पटना की श्रीवास्तव होने के कारण रश्मिप्रभा मेरी पत्नी पूनम को जातिवाद तथा क्षेत्रवाद के आधार पर मेरे विरुद्ध खड़ा कर देंगी और परिवार टूट जाएगा। रश्मिप्रभा ने इस खेल में विभारानी श्रीवास्तव को भी पटना की होने के कारण जोड़ लिया जो मेरे पुत्र को गुमराह करती रहीं। दूसरी ओर वीणा श्रीवास्तव ने अपने जेठ प्रदीप तिवारी( जो तांत्रिक गतिविधियों में भी संलिप्त हैं ) को CPI में मेरे विरुद्ध सक्रिय किया। राजनीति,समाज,परिवार और ब्लाग/फेसबुक सभी क्षेत्रों में श्रीवास्तव/तिवारी ग्रुप हमें नेस्तनाबूद करने पर आमादा है और विभारानी श्रीवास्तव का ताज़ातरीन ब्लाग पोस्ट उसी की एक कड़ी है।
पटना की श्रीवास्तव ब्लागर्स की भांति ही पूनम भी एकेडेमीकली ओवर क्वालिफ़ाईड हैं और यदि उसी परंपरा के अनुसार अपनी बुद्धि को अपने पैरों में रखती हैं तो अपनी सजातीय और क्षेत्रीय ब्लागर्स के बहकावे में आकर अपने परिवार को तोड़ सकती हैं। चाहे जो भी स्थिति हो हम अकेले और अलग-थलग पड़ने के बावजूद RSS/मोदी/आ आ पा का समर्थन शरीर में रक्त की अंतिम बूंद व अंतिम सांस रहने तक नहीं करेंगे। कल की जगह आज और आज की जगह अभी -अभी मैं मौत का सामना करने हेतु तैयार हूँ। रही बात पुत्र की तो अवस्थानुसार वह अपना निर्णय लेने व राह चुनने को
स्वतंत्र है।
न हमने कुछ बोया न कुछ उखाड़ा।

 

विद्रोही स्व-स्वर में क्या संदेश है नई उम्र की नई फसल का ?—विजय राजबली माथुर

कल 12 मई को 16 वीं संसद हेतु अंतिम चरण का मतदान होगा। इन चुनावों में 10 करोड़ नए मतदाता जुड़े हैं। विश्लेषक घोषणा कर रहे हैं कि इन नए युवा मतदाताओं का निर्णय नई दिशा देगा। टी वी चेनल्स,सोशल मीडिया,कारपोरेट प्रिंट मीडिया एक स्वर से ‘सांप्रदायिक तानाशाही’ का स्वागत करते प्रतीत हो रहे हैं। उस पार्टी द्वारा 10 हज़ार करोड़ रुपए विज्ञापनों पर खर्च किए जा चुकने का अनुमान है। साप्रदायिक दंगों ,व्यक्तिगत दोषारोपण का भी भरपूर प्रयोग किया गया है।
फिल्म ‘नई उम्र की नई फसल ‘ में भी नए युवा वर्ग के जोश और व्यापारी की तिकड़मों -छल और धन के कुत्सित खेल को दर्शाया गया है। एक होनहार छात्र राजीव को सेठ जगन्नाथ ने उन वर्मा जी को हराने के उद्देश्य से उनके विरुद्ध खड़ा करवा दिया जो छात्रों व जनता के हितैषी थे। सेठ जगन्नाथ अपने पैसों और तिकड़म के बल पर जीत के मंसूबे पाले हुये थे। किन्तु जब चुनाव परिणाम आए तब सेठ जी की जमानत ज़ब्त हो गई और युवा जोश का प्रतीक राजीव सिर्फ एक वोट से हार गया।
जनतंत्र में जनता अब जागरूक है और उद्योगपतियों व व्यापारियों के छल को समझती है। हम उम्मीद करते हैं कि इन चुनावों के माध्यम से नई उम्र की नई फसलकी भांति ही कारपोरेट जगत व सांप्रदायिक शक्तियों का गठजोड़ भारी पराजय का सामना करेगा और युवा वर्ग को भविष्य हेतु नई प्रेरणा मिलेगी जिससे भविष्य में वह फिर गुमराह न हो सके।

 
 
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