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विद्रोही स्व-स्वर में कुछ आज की :कुछ कल क ी ‘ टाईम नहीं है ‘ — विजय राजबली माथुर

टाईम नहीं है :
July 3,2015 at 9:37am · Edited ·

कल दो पहर पौने दो बजे एक साहब का फोन आया कि यदि शाम को पानी नहीं बरसा तो वह अपने भाई साहब के काम से आएंगे। शाम तक मौसम सूखा रहने पर पौने छह बजे उनकी सूचना आई कि कुछ तकनीकी कारणों से वह न आ सकेंगे फिर कल -वल में देखेंगे।
इस प्रसंग ने कुछ पुरानी यादें ताज़ा कर दीं। बात 15 वर्ष पुरानी 2000 ई .की हैं। मैंने सरला बाग,दयालबाग (आगरा ) में अपना ज्योतिष कार्यालय खोला था। आर्यसमाज के नेता और व्यापारी एस पी कुमार साहब का सुझाव था कि खुद को व्यस्त दिखाओ और जब कोई बुलाये तो उसको कहो कि टाईम नहीं है बाद में समय लेना। इसी प्रकार हमारे पड़ौसी नरेंद्र चौहान साहब का सुझाव था कि एक पर्दा लगा कर पार्टीशन कर लो तथा बाहर लोगों से इंतज़ार करवाओ जिससे लगे कि काफी व्यस्त हो।
कुमार साहब को हार्ट अटेक हुआ और उनकी दुकान में चोरी भी हो गई ,वह व्यापार समेट कर बंगलौर चले गए। चौहान साहब पर भी हार्ट अटेक ने धावा किया। सब को त्वरित उपचार की ज़रूरत थी यदि तब डॉ/चिकित्सक भी टाईम के नाम पर उनसे इंतज़ार करवाते तो उन पर कैसी बीतती?
मैंने उनमें से किसी के सुझाव को नहीं माना था और लोगों को तत्काल उपलब्ध रहता था। यह अलग बात है कि जिनको मैंने मदद की उन लोगों में से अधिकांश ने मतलब निकल जाने के बाद लात ही मारी। किन्तु वक्त पर मुझे अनजान-अपरिचित लोगों की सहायता मिलती रही है।
https://www.facebook.com/vijai.mathur/posts/905345732860737

July 7,2015 at 8:18pm · Lucknow ·

कुछ अराजक व शरारती स्वभाव के लोग जब अपने खास संबंधियों को भी न बख्शें और किसी अन्य से यह अपेक्षा करें कि वह/वे उनके बहकावे में आकर उनके जाल मे फंस जाएँगे। तब इसे उन ज़रूरत से ज़्यादा चालाक लोगों की ‘परले दर्जे की मूर्खता’ ही माना जाएगा।

Satyanarayn Tirpathi पर ऐसेलोग ही अपने को सबसेज्यादा होशियार मान के चलते है पर समाज मेउनकाआत्मिक सम्मान उनकास्वय कापरिवार ही नहीकरता ॽ
Yesterday at 6:14am
https://www.facebook.com/vijai.mathur/posts/907424232652887

 
 
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