RSS

विद्रोही स्व-स्वर में ‘ज्ञान ‘ से शत्रुत ा रख कर जीत – विक्टरी कैसे हासिल होगी ? —— विजय राजबली माथुर

29 Apr

ब्रह्म समाज के माध्यम से राजा राम मोहन राय ने विलियम बेनटिक से भारत में ‘अङ्ग्रेज़ी’ शिक्षा लागू करवाईथी। उनका दृष्टिकोण था कि, अङ्ग्रेज़ी साहित्य द्वारा उनके स्वतन्त्रता संघर्षों का इतिहास भी हमारे नौजवान सीखेंगे और फिर भारत की आज़ादी के लिए मांग बुलंद करेंगे और हुआ भी यही। मोहनदास करमचंद गांधी,सुभाष चंद्र बोस,जवाहर लाल नेहरू,भगत सिंह,चंद्रशेखर आज़ाद सभी अङ्ग्रेज़ी साहित्य से भलीभाँति परिचित थे और आज़ादी के बड़े योद्धा बने।
हालांकि वर्तमान केंद्र सरकार का उद्देश्य ‘संस्कृत’ को बढ़ाने के पीछे कुछ और है जैसे कि, तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने सस्ते भारतीय क्लर्क पाने के उद्देश्य से ‘अङ्ग्रेज़ी’ को लागू किया था लेकिन वह आज़ादी के आंदोलन का एक बड़ा हथियार भी बनी। उसी प्रकार राजा राम मोहन राय सरीखा व्यापक दृष्टिकोण अपनाए जाने की नितांत आवश्यकता है। जब आप संस्कृत जानेंगे तब आप ब्राह्मण वाद की लूट की चालाकी को भी समझेंगे और उसका प्रतिकारकर सकेंगे।
उदाहरणार्थ आपको स्तुतियों में एक शब्द मिलेगा- ‘सर्वोपद्रव्य नाशनम ‘ अब ब्राह्मण यजमान से ऐसे ही वाचन करवाता है जिसका आशय हुआ कि, सारा द्रव्य नष्ट कर दो। जब आपकी प्रार्थन्नुसार सब द्रव्य नष्ट होगा तब आप ब्राह्मणों के मकड़ जाल में – दान दक्षिणा देने के फेर में फसेंगे।
लेकिन अगर आप ‘संस्कृत’ के ज्ञाता बन जाते हैं तब आप जानेंगे कि, इस शब्द का पहले संधि-विच्छेद करना फिर वाचन करना है।
अर्थात जानकारी होने पर वह शब्द ‘सर्व’ + उपद्रव ‘ + नाशनम पढ़ा जाएगा जिसका अर्थ है सारे उपद्रव अर्थात पीड़ाओं को नष्ट कर दो। अब आप दान-दक्षिणा के फेर में नहीं फंस सकते।
चतुराई इसी में है कि, अधिकाधिक लोग ‘संस्कृत’ की जानकारी हासिल करके वेदों के माध्यम से सारे विश्व की मानवता की एकता की बात को बुलंद करें और ब्रहमनवाद की लूट को ध्वस्त करें।
कुछ ब्राह्मण वादी नहीं चाहते कि संस्कृत पर उनका एकाधिकार समाप्त हो वे उसको सार्वजनिक करने का विरोध कर रहे हैं उनके जाल में नहीं फंसना चाहिए और ज्ञान का विस्तार करना चाहिए जिससे मानव कल्याण संभव हो।

https://www.facebook.com/vijai.mathur/posts/1070815762980399

****************************************
लेकिन क्या करेंगे जब अति विद्वजन घोंगावादी प्रवृति को त्यागने को ही राज़ी न हों। कभी एथीज़्म/नास्तिकता के नाम पर तो कभी मूल निवासी के नाम पर संस्कृत का विरोध करने वाले वस्तुतः पोंगापंथी ब्राह्मण वाद के उस सिद्धान्त को ही लागू रखने के पक्ष धर हैं जिसके अनुसार ‘वेद’ पढ़ने का अधिकार शूद्रों को न था और गलती से वेद वचन सुन लेने वाले शूद्र के कान मे सीसा (lead ) डाल कर उसे बहरा बना दिया जाता था। आज के उदारीकरण के युग का सीसा- lead एथीज़्म और मूल निवासी में रूपांतरित हो गया है। यह वर्ग संस्कृत पर ब्राह्मणों के एकाधिकार वादी वर्चस्व को टूटने न देने के लिए और बहुसंख्यक जनता को मूर्ख बनाए रख कर उल्टे उस्तरे से मूढ़ने हेतु संस्कृत के विरोध में डट कर आवाज़ बुलंद कर रहा है।
जिसका एक और उदाहरण ‘दुर्गा -सप्त शती’ से प्रस्तुत है जिसमें एक स्तुति के बीच शब्द ‘ चाभयदा ‘ आता है इसका वाचन पोंगा-पंडित ऐसे ही कराते हैं जिसका अर्थ हुआ कि, आप प्रार्थना कर रहे हैं – और भय दो। जब आप भय मांगेगे तो वही मिलेगा जिसके निराकरण के लिए आप दान-दक्षिणा के फेर में फंस कर अपनी आय व्यर्थ व्यय करेंगे।
अब यदि आपको संस्कृत का ज्ञान होगा तब आप इसको संधि- विच्छेद करके यों पढ़ेंगे : च + अभय + दा अर्थात ‘और अभय दो’ जब आप अभय ( भय = डर नहीं ) मंगेगे तो निडर बनेंगे और ब्राह्मण वाद से गुमराह नहीं होंगे। हमने एक ब्लाग के माध्यम से जन – हित में स्तुतियाँ देना प्रारम्भ किया था किन्तु ज़्यादातर लोगों के हज़ारे के कारपोरेट भ्रष्टाचार संरक्षण आंदोलन का समर्थन करने के कारण उस ब्लाग को हटा लिया था । लोग जब जाग्रत ही नहीं होना चाहते तब किया भी क्या जा सकता है। वेदना होती है विद्वानों से मूर्खता की बातें जान कर ।
जिन वेदों में विशेषकर ‘अथर्व वेद’ जो ‘आयु का विज्ञान’ है में समझाया गया है कि नव रात्र अर्थात नौ जड़ी-बूटियों का सेवन करके ‘नीरोग’ कैसे रहा जाये उसे पौराणिक ब्राह्मण वादियों ने झगड़े की जड़ बना कर समाज में विग्रह उत्पन्न कर दिया है और मूल निवासी तथा एथीज़्म वादी उस चक्रव्यूह में उलझे हुये हैं। जे एन यू विवाद के मूल में भी यही अज्ञानता है। ‘ज्ञान’ से शत्रुता रख कर जीत – विक्टरी कैसे हासिल होगी ?
https://www.facebook.com/vijai.mathur/posts/1071154336279875

Advertisements
 

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

 
%d bloggers like this: