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Category Archives: कटारा

आगरा/1992-93/विशेष राजनीतिक (भाग-7 )

गतांक से आगे…..
शाखा लँगड़े की चौकी के मंत्री कामरेड एस कुमार (जिसे कभी मिश्रा जी बड़ा प्यारा कामरेड कहते थे) को कटारा के बेटे ने पार्टी कार्यालय मे ही पीट दिया। अब तो आगरा के कामरेड्स मे मिश्रा जी और कटारा के विरुद्ध उबाल ही आ गया था। एस कुमार जी भी अनुसूचित वर्ग से संबन्धित थे अतः यह माना गया कि मिश्रा जी का गुट कामरेड नेमीचन्द को हतोत्साहित करने हेतु ऐसी ओछी हरकतें जान-बूझ कर कर रहा है। एक बार पुनः राज्य-केंद्र पर अधिकृत तौर पर मिश्रा जी और कटारा साहब के विरुद्ध कारवाई करने का निवेदन किया गया। कामरेड काली शंकर शुक्ला जी का वरद हस्त मिश्रा जी का रक्षा कवच था। कामरेड रामचन्द्र बख्श सिंह ने खुद आगरा आकर सब की सुन कर कोई ठोस निर्णय लेने का आश्वासन दिया। मिश्रा जी ने दिलली  की भाग-दौड़ करके कामरेड रामचन्द्र बख्श सिंह के स्थान पर राज्य सचिव कामरेड मित्रसेन यादव का आना सुनिश्चित करवाया।

दिन मे आगरा की भाकपा जिला काउंसिल की बैठक भी राज्य सचिव के समक्ष हुई । लिखित और मौखिक शिकायतें उनको सौंपी गई। मिश्रा जी बैठक से अलग ले जाकर मित्रसेन यादव जी से मिले और उन्हें कुछ घुट्टी पिला दी। मिश्रा जी और कटारा साहब को पार्टी से हटाने का जो प्रस्ताव था उसे मित्रसेन यादव जी के कहने पर पास नहीं किया गया। उन्होने इन दोनों के सुधर जाने का आश्वासन अपनी तरफ से दिया। उनकी बात न माने जाने का प्रश्न ही न था। रात को राजा-की-मंडी स्टेशन पर ‘गंगा-जमुना एक्स्प्रेस’ मे मित्रसेन जी को बैठाने जिला मंत्री नेमीचन्द जी ,मै और किशन बाबू श्रीवास्तव साहब तो गए ही कटारा साहब भी मिश्रा जी के सुझाव पर पहुँच गए थे। स्टेशन पर मित्रसेन जी ने कटारा साहब से कहा मिश्रा जी का ख्याल रखो।

 

आगरा /1992 -93 ( विशेष राजनीतिक भाग- 6 )

गतांक से आगे…..

भकपा जिला काउंसिल के कार्यालय ‘सुंदर होटल’,राजा-की-मंडी मे रमेश कटारा ने कामरेड किशन बाबू श्रीवास्तव पर हमला कर दिया । नेमीचन्द समेत हम सभी लोगों ने इसे गंभीर चुनौती के रूप मे लिया । जिस शख्स को मिश्रा जी ने केंद्रीय कंट्रोल कमीशन के चेयरमेन कामरेड काली शंकर शुक्ला के प्रभाव से यू पी राज्य कंट्रोल कमीशन का सदस्य बनवाया हो वह बगैर मिश्रा जी के समर्थन के डॉ धाकरे के गुट के माने जाने वाले का  श्रीवास्तव पर पार्टी कार्यालय मे हमला करने का साहस नहीं कर सकता था। श्रीमती श्रीवास्तव ने हम लोगों को बताया था कि आतंक का सहारा लेना मिश्रा जी के लिए नई बात नहीं है। पहले भी इसी कार्यालय मे मिश्रा जी और उनके सहयोगी का जगदीश प्रसाद ने डॉ राम विलास शर्मा पर साइकिल की चेन से हमला किया था। डॉ राम विलास जी ‘सेंट जौंस कालेज,आगरा’ से जाब छोड़ कर दिल्ली चले गए और वहीं बस गए। मिश्रा जी के व्यवहार के कारण एक विद्वान लेखक का नाता आगरा से टूट गया।

हमने अधिकृत रूप से राज्य सचिव कामरेड मित्रसेन यादव जी को सूचित किया। पार्टी कार्य से लखनऊ आने पर कामरेड रामचन्द्र बख्श सिंह से निजी मुलाक़ात करके पूरी घटना और उसमे मिश्रा जी की संलिप्तता का विवरण दिया। उन्होने खेत-मजदूर सभा के नेता और सांसद कामरेड राम संजीवन को आगरा जाकर तहक़ीक़ात करने को कहा। जब कामरेड राम संजीवन आगरा आए तो मिश्रा जी और उनके गुट का कोई सदस्य स्टेशन उनकी अगवानी करने नहीं गया। होटल मे भी मिश्रा जी उनसे नहीं मिले लेकिन कटारा ने अपनी सफाई दी। मैंने कामरेड श्रीवास्तव और उनकी पत्नी की उनसे विशेष रूप से मुलाक़ात करवा दी थी। सुबह की ताज से आकर शाम की ताज से राम संजीवन जी दिल्ली लौट गए। उन्होने अपनी रिपोर्ट लखनऊ भेज दी होगी। आगरा पार्टी के कामरेड्स ने कटारा और मिश्रा जी को पार्टी से निकालने की मांग रखी थी।….  

 
 
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