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Category Archives: डेथ

आगरा/१९८२-८३(भाग २)-कारगिल की दो बातें

कारगिल में हालांकि इस बार कुल एक माह भी नहीं रहे,परन्तु इस बार स्वास्थ्य अधिक ख़राब हुआ.चंढोक साहब खुद को ग्यानी भी बताते थे उन्होंने मुझ से कहा था दिसंबर तक का समय तुम्हारे लिए बहुत खराब है,तुम्हारे सर पर छत भी गिर सकती है.उनके पास कौन सी दिव्य-शक्ति थी इसका तो पता नहीं चला किन्तु उनकी बातों से यह आभास हो गया कि,जिन लोगों को कारगिल भेजा जाता है वह पनिशमेंट के तौर पर होता है जिसमें वह खुद भी शामिल हैं.वह मुझ से कहते थे कि अकौन्ट्स छोड़ कर आपरेशन्स में आ जाओ जिसमें बहुत मजे हैं.पहले वह खुद होटल होलीडे इन में चीफ अकाउनटेंट थे किन्तु होटल मुग़ल में उन्हें फ्रंट आफिस सुपरवाईजर की पोस्ट मिली थी.यह हकीकत थी.
पिछली बार जब टोनी चावला जी को हार्ट में पेन हुआ था तो मैनें उन्हें ‘मृग श्रंग भस्म’ शहद के साथ सेवन करने का सुझाव दिया था जो शायद उन्होंने नहीं किया.एलोपैथी तो उन्हें जवाब दे ही चुकी थी.कारगिल से लौटने के बाद उन्हें आई.टी.सी.छोडनी पडी और दूसरी जगह कुछ दिनों बाद उन्हें दुनिया ही छोडनी पड़ गयी ,उनका हार्ट का होल जान लेवा बना.
हार्ट की मजबूती के लिए मैनें सम्पर्क के सभी लोगों को आयुर्वेदिक फार्मूला बताया था कि भोजन के बाद सर्वप्रथम मूत्र -त्याग करना चाहिए उसके बाद ही जल ग्रहण करना चाहिए.शायद ही कोई आधुनिक व्यक्ति इस नियम का पालन करना चाहेगा,जब ई.सी.जी.,बैलूनिंग आदि उपलब्ध हैं तो क्यों कोई कष्ट उठाये?आखिरकार एम्.बी.बी.एस.,एम्.डी.,एम्.एस.करने में जो लाखों खर्च करके डा. बने हैं वे बेरोजगार नहीं हो जायेंगे क्या?
पिछले साल लौटते में तो शिकारा में ठहरने के कारण डल झील में रुके थे परन्तु कारगिल जाने से पहले जब श्री नगर में ठहरे थे तो साथ के लोग पहलगाम घूमने गए थे और मैं घूमने का शौक़ीन नहीं हूँ नहीं गया था.लेकिन कमरे पर अकेले-अकेले करता भी क्या ?डल झील के चारों और चक्कर काट डाला.औरों को इतना पैदल चल लेने का ताज्जुब भी हुआ.चक्कर पूरा करने के बाद ढाई रु.की ढाई सौ ग्राम चेरी खा ली थी.श्री नगर में तब. ६० पै.की फीकी,.८० पै.की नमकीन और रु.१/-की मीठी ब्रेड मिलती थी.मैं अक्सर मीठी ब्रेड ले लिया करता था.कारगिल में फीकी ब्रेड ही चलती थी.पहले १९६१ तक लखनऊ में भी फीकी ब्रेड का ही चलन था किन्तु अब तो आगरा की भाँती यहाँ भी नमकीन ब्रेड का चलन है.वैसे ही  लोगों के चाल-चलन में अब मिठास नहीं रह गयी है और खारा-पन आ गया है.
ड्यूटी पर न लिया जाना 
हालांकि इस बार चंढोक साहब की आगरा जाने हेतु मेरे पास लिखित परमीशन थी,फिर भी जी.एम्.-चावला साहब के निर्देश पर मुझे ड्यूटी पर नहीं लिया गया.असिस्टेंट पर्सोनेल मेनेजर श्री जोसेफ जार्ज को दवाएं देकर कारगिल रवाना किया जा चुका था ताकि मैं वहां से लौटू न ,मैंने वहां से पत्र द्वारा अस्वास्थ्यकर वातावरण की सूचना भेज दी थी.पर्सोनल मेनेजर हेमंत कुमार जी ने जी.एम्.चावला साहब को फोन पर बताया-“परमीशन दित्ता”अर्थात चंढोक साहब ने मुझे एलाऊ कर दिया था कारगिल छोड़ने के लिए.जब वे कारगिल के सरकारी डा.की रिपोर्ट नहीं मान रहे थे तो मैंने ई.एस.आई.डिस्पेंसरी का उपयोग किया परन्तु वहां के डा.की रिपोर्ट भी नहीं मानी गई.दो माह बाद मुझे हेमंत कुमार जी ने सूचित किया कं.डा.एच.बी.माथुर को दिखाओ,वैसा ही किया.डा.साहब हमारे फूफा जी के रिश्ते के छोटे भाई थे उनसे पूर्व परिचय था और वह पहले जब श्री रवी प्रकाश माथुर पर्सोनल मेनेजर थे मेरे प्रोमोशन की सफल  सिफारिश भी कर चुके थे.डा. साहब ने इलाज तो किया लेकिन मेनेजमेंट का यह सन्देश सुनाया कि जब तुमने मेनेजमेंट की बात पर युनियन में दुबारा सक्रिय होना स्वीकार नहीं किया है तो भविष्य में फिर कभी सक्रिय नहीं होगे ऐसा आश्वासन मुझे दो तो मैं उसे आगे फारवर्ड कर दूं.डा.साहब की इज्जत और पहले उनसे प्राप्त सहयोग के कारण उनकी बात मान ली.उसी दिन मुझे ड्यूटी पर ले लिया गया.पुरानी  सीट न देकर नई पोस्ट क्रियेट करके मुझे इन्टरनल आडीटर बनाया गया.
इस बीच टूंडला से शालिनी को बुलाया जा चूका था ,पुनः अगस्त में उनके पिताश्री के साथ बउआ ने भिजवा दिया.जहां २४ नवंबर १९८२ की प्रातः ४ बजे  एक पुत्र का जन्म हुआ जो उसी दिन शाम ४ बजे संसार से कूच भी कर गया.रात को शालिनी के रेलवे वाले भाई (शरद मोहन जो कभी पहले हमारे घर नहीं आए थे और जिनकी माता कहती थीं कि वह खुशखबरी लेकर आयेगा)आ कर बोले बच्चे की डेथ हो गईऔर  मुझे बुला ले गए थे यही थी उनकी खुशखबरी .२५ की प्रातः उसका अंतिम संस्कार भी मुझे ही करना पड़ा.बउआ और बाबूजी बाद में पहुँच पाए उनके साथ मैं आगरा लौट आया.बाबूजी ने तो उसकी शक्ल भी न देखी थी.बउआ और मैं तो शालिनी के पिताजी के साथ २४ ता.को गए थे और दोपहर में लौट आये थे.चंढोक साहब का इन्ट्यूशन सही निकल गया था.
फिलहाल शालिनी को कुछ दिन और वहीं रहने दिया गया तथा मकर संक्रांति के अवसर पर बुलवा लिया गया.
क्रमशः……
 
 
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