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Category Archives: धमकी

प्राप्त कुछ चुनिन्दा महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ

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आपसे मिलकर बहुत अच्छा लगा। आपके कमेन्ट के माध्यम से यहाँ पहुंची हूँ। आगरा मेरी ससुराल, और लखनऊ माइका है। न्यू -हैदराबाद में डॉ ओ पी सिंह और सहारा इंडिया वाली लेन में बहुत वर्ष तक रह चुकी हूँ। आपकी पोस्ट्स पर लखनऊ का विस्तार से वर्णन पढ़कर, यादें ताज़ा हो गयीं ।

आभार ।
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आदरणीय विजय माथुर जी,

आपके संस्मरण पढ़ते समय बहुत कुछ सीखने को मिलता है। आपके बताये गए प्रसंग बहुत प्रेरक होते हैं। मन उर्जा एवं स्फूर्ति से भर उठता है। शास्त्री जी पर लिखी कविता बहुत उत्कृष्ट है एवं उनके व्यक्तित्व को बखूबी बयान करती है। यदि आपकी तरह और भी लोग इस प्रकार संस्मरण लिखें तो हम लोगों को बहुत कुछ सीखने को मिलेगा।

यशवंत जी,
आपने बहुत मेहनत से टाइप किया है। आपका कार्य एवं निष्ठां बेहद सराहनीय है ।

आभार।

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आसमान में काला,नीला,पीला धुंआ
आपकी रचना बहुत ही रोचक रहती है !
पढ़ने में बहुत अच्छा लगता है 🙂 
यादें-संस्मरण अक्सर खट्ट्-मीठे होते हैं पर ये रोचक रहे…
  1. .

    आदरणीय विजय जी,

    इतना बढ़िया लेख आपके सुन्दर और भावुक मन की परिचायक है। विभिन्न ब्लॉग के लेखों पर आपके कमेंट्स में इमानदारी, सच्चाई एवं निर्भीकता दिखती है। बहुत से विषयों पर आपके कमेंट्स में ढेरों जानकारी मिलती है जो अक्सर किताबों में उपलब्ध नहीं होती। सभी विषयों में ख़ास कर आजादी के दीवानों , महापुरुषों और शहीदों के बारे में आपका ज्ञान अद्भुत है। आपके अन्दर राष्ट्र के लिए असीम प्यार दीखता है।

    विजय जी, मैंने अपने जीवन में आप जैसे निष्पक्ष, इमानदार और संवेदनशील व्यक्ति कम ही देखे हैं। आप के ब्लॉग पर बहुत कुछ नया सीखने को मिलता है। आपने जो स्नेह मुझे दिया है, उसके लिए आपकी आभारी हूँ।

    वीना जी मेरी बहुत अच्छी मित्र है , उनकी रचनाओं से बहुत प्रभावित हूँ। आशीष जी एवं वीना जी की नियमित पाठक हूँ। पाखी एवं माधव के ब्लॉग निसंदेह सराहनीय हैं।

    इस सुन्दर लेख के लिए आपका आभार विजय जी।

    नवरात्री की शुभकामनाओं के साथ ,
    दिव्या

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  2. आपका सफ़र सतत चलता रहे, सफलता मिलती रहे, शुभकामनाएं.

  3. यही जीवन का फलसफा है…हर मोड़ पर न जाने कितनों से टकराती है…काफी अच्छा लिखते हैं आप.

  4. पहले तो देरी के लिए मुआफी…आपने बहुत अच्छा लिखा है साथ ही हम ब्लॉगर मित्रों का जो मान बढ़ाया है उसके लिए क्या कहूं…इतना कुछ तभी लिखा जा सकता है जब आप खुद किसी के बारे में सोचें और उसकी बातों पर ध्यान दें। ऐसा कहां होता है लोग मिलते हैं फिर आंखों से ओझल भी हो जाते हैं, कौन किसको याद रखता है।
    सबके बारे में जो आपने लिखा है वाकई प्रशंसा के काबिल है। आप जो लिखते है वो ज्ञानवर्धक तो होता ही है, आप इतना बारीकी से अध्ययन भी करते हैं ये भी पता चल गया..यह आपकी खूबी है। आपके लिए और कुछ नहीं कह सकती…शब्द शायद कम पड़ जाएं। दिव्या जी तो खैर लिखती ही अच्छा हैं। बच्चो के ब्लॉग भी छाए ही रहते हैं….बस धन्यवाद
    vijay mathur jee
    sadar namaste
    aapke blog par aane par kuchh nayi rochak aur sargarbhit jankaree milti hai …..lekin mai aapko bahut hee dhanyabad dena chahuga mere blog par aapke aagaman ke liye ..kyoki aap sirf aaye hee nayi balki meri un rachnao ko padhe aur apne comment se mera utsah vardhan kiye jinhe likh kar mai kkhud hee bhool chuka tha …aage bhee aapke margnirdeshan kee aasha ke sath..vijay

    नमस्कार माथुर साहब, अचानक निगाह पड़ गयी सो सोचा कुछ लिख दूँ जो दिल को छु गया आज भी आपने “साहब” का इस्तेमाल नहीं भूले बदायूं में भी हम लोग शब्बीर साहब, जेम्स साहब, यही कहा करते थे अब तो सचिन खेल रहा है .खैर शुक्रिया लिखा बहुत अच्छा है 

    प्रिय विजय जी ,
    दीपावली की हार्दिक शुभकामनाये आपके लिए और आपके समस्त परिवार के लिए /
    पुनश्च, सत्य की विजय ही होती है यह ध्रुब सत्य है अतः साहस के साथ अपनी लड़ाई जारी रखे, आपके विजय की कामना करता हूँ /
    आद.विजय जी,
    आप जैसे सच्चे लोगों के रहने से ही ज्योतिष की गरिमा बनी हुई है !
    1. बहुत इमानदारी से और दिलचस्प अंदाज में आपने अपनी ऑटोबायोग्राफी प्रस्तुत की माथुर साहब !
    2. बहुत अच्छी तरह सारी घटनाओं और यादों की माला बना रहे हैं आप…
    3. संदेशपरक …सुन्दर .सार्थक ब्लॉग .बधाई
    4. संस्मरण बहुत रोचक है। बहुत धन्यवाद|
    5. माथुर साह्ब!
      आपकी कलम जानदार है। आपसे भाषा और साहित्य को काफी आशाएं हैं। सीख लेने वाले संस्मरणो के लिए बधाई।
      सद्भावी-डॉ० डंडा लखनवी
      विजय जी आपका मेरठ का सफर बहुत सारे पहलू उजागर करता है ।
      कितना कुछ आपने अपनी यादों के गुलदस्ते में कितने करीने से सहेज कर रखा है ।
      भाई माथुर जी!
      “डंडा” संत स्वभाव की, यही मुख्य पहचान।
      जो भी मिलता है उन्हें, उसको करते दान॥
      ===========================
      आपके अनुभव दूसरों के लिए मार्ग-दर्शक
      सिद्ध होंगे। ज्ञानवर्धक रचना के लिए साधुवाद!
      सद्भावी -डॉ० डंडा लखनवी
      माथुर जी! शासन-सत्ता का इतिहास तो सुलभ हो जाता है। जन- इतिहास की गवाही जन-संस्मरणों में मिलेती है। आपका कार्य सराहनीय है। शानदार प्रस्तुति के लिए साधुवाद!
      सद्भावी -डॉ० डंडा लखनवी
      कारगिल का अर्थ सेब होता है, यह पहली बार पता चला.
      आपके संस्मरण से कई नई बातों को जानने का अवसर मिल रहा है.
      यह तो एक नायाब संस्मरण बनता जा रहा है। शायद आत्मकथा में तबदील हो जाए।

      कृपया ज़ारी रखें। इन आलेखों का सहज प्रवाह और बीते घटनाक्रम से मिलते संदेश प्रेरक और विचारणीय होते हैं।

      कई लोगों ने बहुत सी निजी बातें सार्वजनिक कीं … मैं दो का ही केवल नाम लेना चाहूंगा … हरिवंशराय बच्चन और महात्मा गांधी।
      दोनों की आत्मकथा कालजयी कृतियां हैं।

      माथुर जी! आपको बहुत-बहुत बधाई। दान के विषय में औचित्य एवं अनौचित्य की संक्षित्प किन्तु गर्भित जानकारी दी है। यह विचार जीवन में उतारने वाला है।
      संक्षिप्त में पूरी रामायण एक अलग अंदाज़ और नज़रिए से पढ़कर अत्यंत हर्ष की अनुभूति हुई ।
      न जाने क्यों , मुझे पारंपरिक बातों में एक बनावटीपन सा लगता है । आपकी बातें यथार्थ के करीब लगती हैं । अंतिम पैरा पढ़कर ज्ञान चक्षु और खुल गए ।
      आभार इस शानदार लेख के लिए ।

      रामनवमी की हार्दिक शुभकामनायें माथुर जी ।

      माथुर जी ने महिला दिवस पर जो विचार संप्रेषित किए उनका मैं तहेदिल से समर्थन करता हूँ .हालाँकि बाज़ मरतवा यह भी देखा गया है की वैयक्तिक दांपत्य जीवन में महिला खलनायिकाएँ ओर उनका जीवन साथी पुरुष वेचारा सविट हुआ है .अतएव ज़रूरी यह है की ज़ेंडर भेद को अस्वीकार करने की रौ में हम विश्व महिला दिवस तो आवजर्व करें किंतु हमारा मकसद शोषण विहीन ,वर्ग विहीन ,समतामूलक समाज व्यवस्था की और गतिशील होना चाहिए.
      एक मूर्खतापूर्ण कथा है–
      —-कहां लिखा है कि राम ने वेद-विरुद्ध कार्य किया, जगह जगह विरोधी व असत्य वक्तव्य हैं–
      —जब राम वेद-विरोधी थे तो उन्होंने वेदिक परिपाटी की यग्य क्यों की
      —जब उन्होंने वेद के विरुद्ध मन्दोदरी( कहां लिखा है भाई?) व बाली की पत्नी का विवाह कराया तो सीता ने उनके साथ आने से उसी समय इन्कार क्यों नहीं किया…
      — जब वेदों के अनुसार नियोग प्रथा है , जैसा आपने कहा तो राम वेद-विरोधी कैसे हुए
      —नियोग प्रथा सिर्फ़ सन्तान हीनता की स्थिति में सन्तान उत्पत्ति के लिये प्रयोग होती थी…विवह के लिये नही…
      सारी कथा हिन्दू-धर्म( जिसके अर्थार्थ समझ्ना सबके बस की बात नही है) के विरुद्ध जहर उगलने के सदियों पुराने षदयन्त्र का भाग है…
      maine aaj pahli baar aapke lekh ko pada bahut accha laga, adbhut laga…… ek baat aur janana chahti hoon ki ye lekh stya tha yaa kalpnik mera kahne ka matlab ye hai ki isme aaye naam sataya the yaa kalpnik… saadar
      उत्तर-

      1. सोनिया जी!

        न तो यह कोई लेख है न काल्पनिक। आपने ध्यान से देखा हो तो स्पष्ट है की वह मेरी पहली पत्नी (यशवन्त की जननी माँ )की जन्म कुंडली का विश्लेषण है। उसे आपने किस प्रकार काल्पनिक मानने की कल्पना की?

        1. आडम्बर दिखावा करने की जरुरत भी नहीं है किसको दिखाना है। बाबूजी के सम्बंध में जानकारी मिली । अच्छी जिन्दगी व्यतीत कर गये और उस अनुसार आपको आचरण करने की ,ईमानदारी से जीवन यापन करने की शिक्षा दे गये । बाबूजी को नमन
        2. गुरूजी प्रणाम …देर से पोस्ट पर आने की वजह से …आज ही सही ..आप के पिताजी को मेरी श्रधांजलि सुमन समर्पित है !
        3. बहुत सुंदर.. क्या बात है
        4. बाबु जी को नमन व हार्दिक श्रधांजलि|
        ई मेल द्वारा प्राप्त-
        Arun Roy
        Sep 3 (10 days ago)

        to me
           

        बहुत बहुत धन्यवाद विजय जी कि आपने मेरा मान रख लिया… सादर अरुण

      दूसरे ब्लाग पर टिप्पणियाँ-
      ZEAL said…
      . आदरणीय विजय माथुर जी और पूनम जी मेरे माता-पिता समान हैं और यशवंत जो मुझे “बुआ” कहता है , मेरा प्यारा सा भतीजा है। इस नाते अगम प्रसाद माथुर जी मेरे भी माता-पिता सामान हुए। बहुत अच्छा लग रहा है इतनी बड़ी हस्तियों की संतान कहलाते हुए। .
    6. अल्पना जी , मैं हतप्रभ हूँ ! सपने में भी किसी के लिए नहीं सोचा …… जबकि कई लोग मुझसे किसी के लिए कुछ कहते हैं , पर मैं न उनके नाम उछलती हूँ , न उससे किसी से संपर्क ख़त्म करती हूँ . मेरे ब्लॉग से कई बार लिंक मिट जाता है तो मैं जाना भूल जाती हूँ , वरना मैंने आपके गीतों की हमेशा सराहना की . खैर – मुझे पता भी नहीं था कि अपने आप ऐसा भी किसी ने कह दिया . ओह !
      …………
      फिर भी मैं इस आलेख को पढ़ने के बाद भी किसी के लिए बुरा नहीं सोच सकती

  5. रश्मि जी,
    आप ने यह बात मेरे लिए कही हो या न हो मैं उस तीसरे को यहाँ नहीं घसीटना चाहती.
    आप ने स्पष्ट किया कि आप ने ऐसा कुछ नहीं कहा तो मैं भी मान लेती हूँ कि नहीं कहा होगा.
    …..
    ज्ञात हो,कि आप ने उस इमेल का आज तक जवाब नहीं दिया जिस पर मैंने अपनी असहमति जताई थी.

    बल्कि यह तो सच है कि उस दिन के बाद आप ने मेरी किसी भी पोस्ट पर ही आना छोड़ दिया.
    तब से आज तक एक भी बार आप नहीं आईं ,न संवाद किया .

    और आज इस बात को डेढ़ साल से अधिक हो गया है.

    इस प्रतिक्रिया को कोई क्या समझेगा?
    जबकि एकदम इस बात से पहले आप नियमित आती थीं .
    ज्ञात हो,आप की या किसी की उपस्थिति -अनुपस्थिति से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता.

    लेकिन जब किसी नियमित पाठक का एकदम आना बंद हो जाये ,वह भी एक घटना विशेष के बाद तो संभावनाएँ सच लगने लगती हैं.
    शेष यहाँ कौन वास्तव में कैसा है कोई नहीं जान सकता,हम उतना जान सकते हैं जितना शब्द और उस का ब्लोगिया आचरण उस के बारे में बताते हैं .
    कौन जाने ,कौन क्या-क्या करता है और किस के विरुद्ध !अब तो इस ब्लॉग की दुनिया के लोगों से भी डर लगने लगा है .

    हालांकि डॉ श्याम गुप्ता जी ने भी दूसरे ब्लाग्स पर जम कर मेरे लेखों की धज्जियां उड़ाई हैं उन्होने कहीं यह भी लिखा है कि,”माथुर साहब आप ये क्या बेपर की उड़ा रहे हैं?” लेकिन उन्होने भी कभी उड़ाने या ठिकाने लगाने की धमकी नहीं दी है। किन्तु रश्मी प्रभा जी ने अपनी बेटी की आई डी से,सोनिया बहुखंडी गौड़ द्वारा  -‘खड़ी चेतावनी’ एवं महान पत्रकार महेंद्र श्रीवास्तव साहब के जरिये उनके परिचितों द्वारा – ‘पूरे परिवार को उड़ा दिया जाएगा’ सरीखी धमकियाँ बड़ी शान से दी हैं। जैसा आज समाज मे ‘धन’ और ‘धनिकों’ का बोलबाला है उसे देखते हुये इन धमकियों पर अमल किया जाना इन बिगड़ैल धनिकों के लिए बाएँ हाथ का खेल ही होगा। लेकिन उनको यह भी नहीं भूलना चाहिए कि एक मुझे और मेरे परिवार को मिटा देने मात्र से  ही वे पूरी दुनिया के शहनशाह नहीं बनने जा रहे   क्योंकि-

    धनवानों ने निर्धनों की छाती पर हमेशा मूसल चलाये हैं। 
    जागी जब जनता तब बड़े बड़ों के सिंहासन डोलाए हैं। ।

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